-
Posts
117 -
Joined
-
Last visited
Everything posted by Mr.Meowth
-
Contest [Special] ICC Champions Trophy 2017 Lottery
Mr.Meowth replied to Zenyth in Newspaper Archive
If that is so then this final is going to be challenging for both sides. -
Contest [Special] ICC Champions Trophy 2017 Lottery
Mr.Meowth replied to Zenyth in Newspaper Archive
Aren't you repeating the Ind vs Bangladesh semi final scorecard? India got Bangladesh down to 264 and they won it with 9 wickets to spare and 10 overs to go. -
Contest [Special] ICC Champions Trophy 2017 Lottery
Mr.Meowth replied to Zenyth in Newspaper Archive
Will probably open near to the final date, which is 18th June. It probably would open around late 16th June or maybe 17th. Can we get out of history please? This is cricket :) After the contest ends, i.e after the Final Match is played. If you are not a noob at cricket, then you must know that Cricket is a game of uncertainties. Anything can happen, you never know. there are many incidents which prove this and they can't be counted in number. -
Which are the teams participating?
-
Other [Ank 9] Akhbaar aur Birbal - Patrika #2
Mr.Meowth replied to Zenyth in Hindi Samachar Sangrah (Hindi News Archive)
Maybe -
Contest [Ank 9] Chunauti, Gold Pakadne ki
Mr.Meowth replied to Zenyth in Hindi Samachar Sangrah (Hindi News Archive)
Thanks. I had not noticed that. Since difficulty level is hard, there are only 4 drop zones given. Thanks for notifying me. Updated. -
Other [Ank 10] Badon ka Anubhav aur Unki Seekh
Mr.Meowth replied to Mr.Meowth in [Ank 10] Badon ka Anubhav aur Unki Seekh Hindi Samachar Sangrah (Hindi News Archive)
नमस्ते दोस्तों, मैं हूँ आपका नया दोस्त Mr.Meowth और मैं आज एक बहुत ही अच्छी कहानी आप सब के लिए लाया हूँ। पढ़ना चाहोगे? हाँ, तो पढ़ते रहो। नहीं? तब भी पढ़ते रहो। प्रिय पाठकों, ये कहानी मैंने रची है, और इस कहानी का असल ज़िंदगी से या किसी भी मनुष्य से कोई नाता नहीं है। इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है। अगर आपको लगता है की ये कोई फिल्म है तो आप गलत नहीं है। :P आज भी। आज भी कोई मेरी बातों पर ध्यान नहीं देता, जब मैं उन्हें सलाह देता हूँ। क्यों? क्यों होता है ऐसे ? मैं चाहकर भी किसी की मदत नहीं कर पाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी को भी मेरी बातों से अंतर नहीं पड़ता। उस वक्त भी, जब मैं जवान था, और आज भी, जब मैं एक वृद्ध हूँ। आज की युवा पीढ़ी ये समझ नहीं रही है की उनके प्राणों का क्या मूल्य है। कोई भी विचार नहीं करता कि 'अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे माता-पिता का क्या होगा ?' सब अपनी ज़िंदगी ख़ुशी से बिताना चाहते है, ऐशोआराम चाहते है। इस दौर का शिकार मैं भी होता था, पर मैं उस हद तक नहीं गिरा, जिस हद में मैं आज लोगों को गिरते देख रहा हूँ। प्रश्न ये है, की हम कब बदलेंगे। हमें खुद में बदलाव लाना होगा, और अपनी कमियों को दूर करना होगा। लेकिन ऐसी सोच बहुत काम लोगों की होती है। आज मैं जो कहानी आपको सुनाने वाला हूँ, उसमें आप देखेंगे की कैसे मासूम जानें लापरवाही के कारण जाती हैं। मैं ११ साल का छोटा सा बालक था। अपने पिताश्री के साथ मैंने पहली बार ट्रैन का सफर किया। स्टेशन आते ही सभी लोग उतरने की जल्दबाज़ी कर रहे थे। मुझे लगा की शायद ट्रैन अधिक समय तक स्टेशन में नहीं रुकेगी , इसलिए मैं स्वयं भी उसी भीड़-भाड़ में जाने लगा। मेरे पिताश्री ने मुझे रोका और कहा, "ये क्या कर रहे हो ? अगर गिर गए तो ? उन्हें उतरना है, तो उतरने दो। उन्हें पता नहीं किस की जल्दी है , अगर एक मिनट की देरी हो जाये तो कुछ नहीं होता। शिक्षक की डाँट का मूल्य हमारे प्राणों से तो काम है। अगर डाँट भी खानी पड़े तो ठीक है। " मैं हैरान था, की ट्रैन इतने समय तो रुकी, की सभी यात्री आराम से उतर सकें। लेकिन सभी यात्रिओं को बहुत जल्दी थी, पता नहीं वे कहाँ जाना चाहते थे। उस वक्त जो पिताश्री ने मुझे बताया, वो मेरे ज़ेहम में सदा-सदा के लिए बैठ गया। कई साल बीत गए। मेरी विद्यालय की शिक्षा पूर्ण हो गयी और अब महा विद्यालय, अर्थात कॉलेज का आरंभ होने वाला था। अर्थात, रोज वही भीड़-भाड़ वाली ट्रैन का सफर। पिताजी के दिए हुए ज्ञान को ध्यान में रखते हुए, मैंने कभी भी जल्दबाज़ी नहीं की और स्वयं को सुरक्षित रखने की कोशिश की। कुछ महीनों बाद मेरे सहपाठी मेरे साथ सफर करने लगे। पर वे, मेरे स्वभाव से विपरीत थे। उन्हें भी बाकियों जैसी ही जल्दी थी, और वो हमेशा द्वार के किनारे लटकते रहते थे। मैंने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। एक दिन वो हुआ जिसका मुझे , और मेरे पिताश्री को दर था। एक छोटा सा स्टेशन है , जिसका प्लेटफार्म थोड़ा सा मुड़ा हुआ है, और जिसमें ट्रैन और पुल की दूरी बहुत काम है। मेरे दोस्त लटकते रहे। ३ दोस्त पुल को देख कर पीछे हैट गए, पर एक खंबे से लटका हुआ था और इसलिए वो समय पर भीतर नहीं आ पाया, और उसकी जान चली गयी। सोचकर आज भी बहुत दुःख होता है, भले ही वो थोड़ा सा बुरा था, पर था तो वो मेरा ही दोस्त न ? ना जाने क्यों, मुझे उसकी मृत्यु का सबसे अधिक दुःख हुआ और मुझे आज भी ऐसा प्रतीत होता है की मैं ही उसका गुन्हेगार हूँ। वक्त बीतता गया और मेरी भी उम्र हो गयी। मैं ५० साल का हो चूका था। वो हातसे तब भी मुझे याद था, और बार बार मेरे दिल को झकझोर के रखता था। काम पर जाते और आंकते वक्त का मेरा यातायात स्कूटर से ही होता था। एक दिन मैंने ३ युवकों को एक ही बाइक पर जाते देखा। उनकी हालत ठीक नहीं थी, वे होश में नहीं थे। मैंने उनसे धीरे चलाने के लिए कहा, और तब उन्हों में मुझे अपशब्द कहे, और ये धमकी भी दी , की वो मुझे ही टक्कर मार देंगे। मई मौन रहकर अपना रास्ता देखता रहा। उन्हें देखकर मुझे मेरे मित्र की मृत्यु का वो दृश्य मेरे समक्ष नज़र आता था, पर मैं विवश था की मैं उहे कुछ कह नहीं सकता था। और फिरसे , वही हुआ , जो मैं नहीं चाहता था। अपनी बातों में मंद उन युवकों ने सामने से गुज़रती ट्रक को टक्कर मार दी, और उन तीनों में से २ लोग अपनी जान गवा बैठे। पुलिस की पूछताझ में मैंने यह बयान दिया, की वो लड़के होश में नहीं थे और इसी कारण उन्हों ने ट्रक को टक्कर मारी। मेरे बयान के चलते अदालत ने ट्रकचालाक पर लगे आरोपों को वापस ले लिया और उसे बाइज्जत बरी कर दिया। मैं कोर्ट से बाहर तो आ गया, पर मेरा मन कहता की इस बार भी मैं ही गुन्हेगार हूँ। कदाचित ईश्वर की इच्छा ही नहीं थी कि कोई मेरी बातों को सुने। उस हातसे को १० साल बीत गए। इतने सालों में बहुत कुछ भूला हूँ मैं। अपने विद्यालय के वो दिन , अपनी पढाई , अपने सपने और बहुत कुछ। लेकिन वो दो हातसे चित्र की भाति आज भी मुझे दिखाई देते है और बार बार मेरा हृदय तड़पता है। अपने जीवन में घूम-घूमकर नियति ने फिर मुझे अपने जन्मस्थल में लाया। पता नहीं कैसे, पर मैं उसी ट्रैन में दुबारा चढ़ गया, जिसमें मुझे पिताजी ने जीवन का पाठ पढ़ाया, जिसमें मेरे नेत्रों के समक्ष मेरे मित्र की मृत्यु हुई। इतिहास अपने आप को दोहरा रहा था। ४ युवक द्वार के किनारे खड़े थे। उनकी उम्र भी शायद उतनी ही थी, जितनी उस वक्त मेरी थी। मैंने उन्हें चेतावनी भी दी , की वे ऐसा ना करे। उन्हों ने मेरा अपमान किया और मुझे अपशब्द कहे। मुझे कोई अंतर नहीं पड़ा क्योंकि मुझे तो जीवन भर में अपशब्दों की आदत सी हो गयी थी। मैं नहीं चाहता था की वही सब दुबारा हो। मैं जानता था की वही स्टेशन दुबारा आएगा, और वो आया भी। वे लोग भी उसी किनारे खड़े थे जिस ओर पुल था। मैंने ये निर्णय ले लिया की मैं उन्हें कुछ नहीं होने दूँगा। उलटी गिनती शुरू हो गयी। धीरे धीरे पुल करीब आता गया। पिछली बार की तरह ३ लोग पीछे आ पाए। मैंने चौथे को दूसरी ओर से खींचा और उसे बचा लिया। वो लड़का दंग रह गया था, और वैसे ही सब लोग हैरान थे। उसने मुझे धन्यवाद कहाँ, और उसके मित्र भी प्रसन्न थे। उसी शाम उसके माता-पिता आभार प्रकट करने मुझसे मिलने आये। उस एक पल ने मेरी ज़िंदगी को बदल दिया। मेरे सारे दुःख मानो एक क्षण में नष्ट हो गए। जो मनुष्य जीवन भर दुविधा में जीता था, वही मनुष्य आज स्वतन्त्र महसूस कर रहा था। इस कहानी और इस घटनाक्रम का यही तात्पर्य है, कि हमें भी भी जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, अपने बड़ों का मान करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने हमसे ज्यादा दुनिया देखी है। वे भले ही आधुनिकता के मामले में हमसे काम हो, लेकिन जब बात परिपक्वता की आती है तो हमारे बड़े-बुज़ुर्गों से इस विश्व में कोई बेहतर नहीं। उम्मीद है की आपको ये कहानी अच्छी लगी। दुबारा जरूर मिलेंगे, धन्यवाद! -
He's pretty busy in his real life. I know he recently became one. But it seems that he gets no time for his Admin work.
-
I participated in V log Code contest with old nickname. Will I get my reward even though I got a new nickname? I am sure I got each and every code right.
-
I haven't seen a dream since a year or so. Idk why
-
Mujhe nahi lagta, ki aapko "Hindi" mention karna jaruri hai. Bahut badiya likha hai aapne :)
-
DBF for 24hrs + Sale on "Supplies 1500" and Shop kits
Mr.Meowth replied to theFiringHand in News Archive
Very good for buyers :) Anyway I didn't expect anything better -
Post here your issues with lags and server instability
Mr.Meowth replied to theFiringHand in Archive
Since the merge of servers, I see a drop in my FPS and increase in my PING. Nothing major, it's slight. -
I re submitted a code again with same account just once. Because I had a doubt in my mind that I had misspelled my nickname. I hope I'm not disqualified
-
Can I submit entries for the v log code contest using my main acc and my alt acc?
-
Contest [Ank 8] Hindi Meme Pratiyogita! - III
Mr.Meowth replied to Zenyth in Hindi Samachar Sangrah (Hindi News Archive)
Look at the post of above. You can use EN words when required, i.e. only if you don't get an alternate Hindi word for an English word. Example - Turret and its names, hulls, paint names, tactical elements such as camping, etc. All Hindi words are derived from Sanskrit. has already given an answer to such a question, please do not provide wrong information. Look at the quote below :) -
Capitalization, Punctuation and Structuring. Work on these three and it shouldn't take much time for you to become a PRO. Also, don't forget grammar ;)
-
Premium, Golds, Liquid Metal, and Dream Tanks Giveaway
Mr.Meowth replied to theFiringHand in Contests Archive
Gotcha Liquid Metal :wub: -
Premium, Golds, Liquid Metal, and Dream Tanks Giveaway
Mr.Meowth replied to theFiringHand in Contests Archive
You'll get it anytime today ;) -
Premium, Golds, Liquid Metal, and Dream Tanks Giveaway
Mr.Meowth replied to theFiringHand in Contests Archive
Today, as per announcement. At what time, I don't know -
someone. Gold box will be __________
-
Premium, Golds, Liquid Metal, and Dream Tanks Giveaway
Mr.Meowth replied to theFiringHand in Contests Archive
48 hours from 21 UTC on Sunday, right? This means we'll get it any time today. Can't wait for Liquid Metal -
Cedric, can you show me the part of the video where you answered our questions?
-
Why no info on Valley map?
-
Middle alignment to the Title pic pls :)
Jump to content






































































